Winter Assembly session ends,not in tune with democracy,says Munda

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मुझे, और मैं समझता हूँ कि पूरे सदन को इस बात की चिंता अवष्य है कि तृतीय झारखण्ड विधानसभा का दषम (शीतकालीन) सत्र लोकतंत्र एवं ससंदीय मानदण्ड के अनुकूल शत-प्रतिषत खरा नहीं उतरा। यह चिंता आरोप-प्रत्यारोप का नहीं बलिक चिंतन और आत्मावलोकन का विषय है। राज्य के समक्ष लोकहित के अनेक मुदों हैं और हमसब 3.29 करोड़ जनता के सर्वाधिक हितों को ध्यान में रखकर निरन्तर प्रयास कर रहे हैं, सदन के माध्यम से वे सारी प्रतिबद्धतायें, निष्ठायें एवं संवदेनषील प्रयास परिलक्षित होते हैं। लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था भारत की अनुभूत जीवन पद्धति है, यह हमारा जीवन दर्षन है।

भारत विष्व का द्वितीय सर्वाधिक आबादी तथा सातवां सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला देष है। यह विष्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देष है। सांसद, विधायिका और महात्मा गाँधी के सपनों के अनुरूप ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतों की संरचना लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को प्रतिबिमिबत करता है।

महोदय! मुझे इतना विष्वास है कि चुनौतियों के बावजूद हमारा लोकतंत्र एवं संसदीय व्यवस्था निरंतर सषक्त हो रहा है। इसलिए यह सर्वमान्य है कि लोकतंत्र एकमेव प्रषासनिक पद्धति है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से जन-समस्याओं को प्रतिनिधि के माध्यम से स्वर मिलता है। आमजन का विष्वास ही संसदीय व्यवस्था और प्रजातांत्रिक मूल्यों का आधार है। हमारा लोकतंत्र विष्व में प्राचीनकाल से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष, परम्परागत-संवैधानिक शासन व्यवस्था के माध्यम से विकसित हुआ है। हमने सदैव सत्ता से उपर लोकसत्ता को माना है और व्यकितधर्म, समाजधर्म तथा राष्ट्रधर्म के लिए समर्पण का भाव मन में है। इसी के बीच से सिथरता और उत्तरदायित्व उभर कर आता है। कभी-कभी गतिरोध की सिथति का सास्वत समाधान सार्थक संवाद से स्वत: निकलता है। संसदीय व्यवस्था में जनादेष का समादर सबसे अहम प्रष्न है, यह दलीय और व्यकितगत प्रतिबद्धता से भी उपर है। इसलिए सदन, जहाँ चुनौतियों एवं समस्याओं के समाधान का सम्यक मार्गदर्षक है, वहीं भविष्य का नियामक भी।

महोदय! सरकार ने अगले वर्ष को युवा एवं कौषल विकास वर्ष के रूप में लिया है। राज्य में 20-34 आयुवर्ग के युवकयुवतियों की संख्या लगभग 32: है। हर युवा की कामना होती है, चुनौतियों से जूझते हुए अपने भविष्य का निर्माण करना। हमें उसके लिए समर्थन एवं संवद्र्धन के आधार पर अवसर उपलब्ध कराने की चिंता है। जैसे-जैसे युवाषकित कुषल मानव संसाधन के रूप में अपनी ऊर्जा का उपयोग करेगा, शहरी-ग्रामीण स्वावलम्बन बढ़ेगा और असमानता में कमी आयेगी।

”अवसर सभी को इस चिंतन के आधार पर एक बड़ी आबादी जो किन्हीं कारण से मैटि्रक के नीचे ड्रापआउट हो जाती है को बाजारोन्मुखी रोजगार के लिए प्रषिक्षण, आर्थिक समर्थन और विवरण नेटवर्क देना हमारी चिंता है। निजी क्षेत्र एवं सेवा क्षेत्र में मांग के अनुसार कौषलयुक्त मैनपावर की जरूरत है, इसी के साथ-साथ हमारे राज्य को प्रकृति ने देषज-इकोनामी से जुड़ी संभावनायें दी है। हमें उसे आगे ले जाना है, इसके लिए प्राय: सभी विभाग एक मिषन के तहत क्रियाषील हों, ऐसा मेरा प्रयास है।
महोदय! पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक-सामाजिक चिंतक डा‚ ए‚पी‚जे‚ अब्दुल कलाम ने युवाषकित के सामथ्र्य को पहचाना है और उसके क्षमता निर्माण तकनीक संवद्र्धन के लिए दिषा भी दी है। उन्होंने प्रौधोगिकी एवं सूचना तकनीक को गाँव तक ले जाने और उसके आधार पर देषज अर्थषास्त्र की समृद्धि की बात की है। झारखण्ड का रेषम (तसर) देषज प्रौधोगिकी एवं जैविक अवधारणा का एक उदाहरण है।

महोदय! हमें विकास के सभी आयामों पर एक साथ सहभागी प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए ढाँचागत अवसंरचना, षिक्षा के विविध आयाम, मानव संसाधन सृजन तथा रोजगार और सबसे बढ़कर सामाजिक सुरक्षा के सभी कार्यक्रमों को तेजी से अमलीजामा पहनाना है। इस महत्वपूर्ण आयोजना में पंचायती राज संस्थाओं की महती भूमिका है। इसलिए सरकार ने पंचायतों को शकितयाँ प्रदत्त की हैं और इसके लिए नियमावलियों के माध्यम से शकितयों, कृतियों और दायित्वों की जानकारी भी दी है। योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु प्रषासनिक स्वीकृति का प्रत्यायोजन, पंचायत के पदधारक सदस्यों के लिए सुविधायें, आदि के साथ-साथ सरकार यथा अपेक्षित शकितयों का प्रत्यायोजन ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के आलोक में पंचायती राज संस्थाओं में कर रही है।

हमारी सरकार क्षेत्रीय संतुलित विकास की अवधारणा के तहत ”सबकी समृद्धि : सबका समग्र विकास के लिए योजना एवं उसके अनुरूप वित्तीय प्रबंधन पर बल दे रही है। 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के लिए सरकार ने प्राथमिकतायें रेखांकित किया है। वह चाहे कृषि एवं संबद्ध सेवाओं में विकास हो, शैक्षिक सिथति हो, प्रतिव्यकित आय हो या सर्विस और औधोगिक क्षेत्र हो। ड्रापआउट को संसीमित (25:) कर सभी को रोजगार मूलक प्रषिक्षण से जोड़कर 20 लाख को रोजगार देना उíेष्य है। प्राय: सभी पदोंरिकितयों को रेखांकित करते हुए बड़ी तेजी से उसे भरने का क्रम जारी है। स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रत्येक मानक पर राज्य खरा उतरने की दिषा में अग्रसर है।

सरकार ने औधोगिक नीति-2012 लागू की है। इसके माध्यम से राज्य में सभी क्षेत्रों में उधम-उधमिता विकास के साथ-साथ बेहतर मानव संसाधन सृजन उíेष्य है। सरकार देषज हुनर को तकनीक के साथ जोड़कर रोजगार सृजन को चुनौती के रूप में ले रही है। प्राय: सभी क्षेत्रों में युवाषकित को रोजगार मिले, यह मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एक साल के अन्दर हम च्च्च् डवकम के तहत ऊर्जा के क्षेत्र में सरप्लस उत्पादन करेंगे। ज्ञान और कौषल पर आधारित समाज संरचना ही इस राज्य को समृद्धि की ओर ले जाने में सक्षम होगी।

महोदय! पथ निर्माण समस्त आर्थिक-सामाजिक क्रियाओं का आधार बिन्दु है। हमनें इसको सर्वोच्च प्राथमिकता में लिया है। राज्य में लगभग 7050 कि‚मी‚ पथ हैं, जिसमें 1886 कि‚मी‚ ैजंजम भ्पहीूंल और 4987 कि‚मी‚ डक्त् है। इसी प्रकार एन‚एच‚ 1833 कि‚मी‚ है। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक गाँव जिला मुख्यालय से और अन्तर्राज्यीय पथों से जुड़ें। इस दिषा में तेजी से काम हो रहा है। वर्ष 2012-13 में 1650 करोड़ बजटीय उपबंध के आलोक में 2100 कि‚मी‚ पथों एवं 70 पुलों पर कार्य चल रहा है, इसी प्रकार इसी अवधि के लिए 1000 कि‚मी‚ पथों एवं 84 पुलों की स्वीकृति दी जा रही है। सरकार 1301000 वर्ग कि‚मी‚ के घनत्व को शीघ्र प्राप्त करने का लक्ष्य रखती है।

महोदय! मंजिल तक जाने के लिए रास्ता बनाना होता है और झारखण्ड के साथ यही सिथति है। मैं, बाधाओं की चर्चा नहीं करता पर इस बात पर अवष्य जोर दे रहा हूँ कि इस दिषा में सबका सहयोग राज्य की शकित होगी।

आज यह भी मूल्यांकन का विषय है कि हमारी प्राकृतिक संपदा हमारे विकास के लिए कितना सहायक है और अधिकतम सहायक कैसे बन सके? सबसे बढ़कर हमारे मैनपावर को गुणवत्तायुक्त बनाना है। हमें ळतवनदक त्मंसपजल को समझते हुए अपनी इकोनामी को राष्ट्रीय इकोनामी के संदर्भ में आगे ले जाना होगा। इस बात का मूल्यांकन करना होगा कि हमारे ळंचे क्या है? उनको ग्रोथ के साथ कैसे पाटा जायेगा?

मैंने राज्य की प्राथमिकताओं को प्राय: प्रत्येक फोरम पर पुरजोर ढंग से रखा है और एक-एक बिन्दु से सभी पक्षों को अवगत कराया है। हम पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ उनके समग्र विकास के लिए चिंतित हैं, जिनके चलते 30: क्षेत्र वन अच्छादित है। हमारी सोच है कि स्वू ब्वेज चवूमत ळमदमतंजपवद हो और स्वूमेज तंजम व चिवससनजपवद हो।

महोदय! ढाँचागत विकास के क्रम में मैं, यहाँ दोहराना चाहूँगा कि माननीय उच्च न्यायालय, विधानसभा एवं सचिवालय भवन तथा संबंधित अन्य अवसंरचना के लिए सरकार कृत संकल्प है। हम प्रत्येक क्षेत्र में अपनी बेहतर पहुँच के माध्यम से आमजन की समृद्धि के रोडमैप पर कार्य कर रहे हैं। 12वीं पंचवर्षीय योजना के सभी मानकों पर हम खरा उतरेंगे और राज्य की युवाषकित को ‘उड़ान का भरपूर अवसर प्रदान करायेंगे।

मैं माननीय अध्यक्ष, नेता, प्रतिपक्ष, सभी दलों के नेता एवं सभी माननीय सदस्यों का आभारी हूँ, जिनकी लोकहित की चिंता विविध विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से सामने आयी है। मैं सभा सचिवालय के पदाधिकारियोंकर्मचारियों को भी उनके सक्रिय सहयोग-समर्थन के लिए धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।
आभारी हूँ, मीडिया के मित्रों का जिन्होंने सार्थक संवाद को सुस्थापित किया है।

इस सत्रावधि में कुल 439 प्रष्न प्राप्त हुए, जिनमें 102 अल्पसूचित, 176 तारांकित और 55 अतारांकित रूप में माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा स्वीकृत किए गए। सरकार ने प्रष्न एवं अन्य सूचनाओं का हर संभव उत्तर देने का प्रयास किया है।

अन्त में मैं, आपके माध्यम से एक बार पुन: सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ।

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