समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्य गाँव-गाँव तक नजर आने चाहिए

Press Release

राँची, 31 जुलार्इ, 2012
Social Welfare , Jharkhand Social Welfare

समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्य गाँव-गाँव तक नजर आने चाहिए। राज्य मुख्यालय में बैठ कर योजनाओं का निर्माण ही मात्र दायित्व नहीं है, बलिक ग्राम, प्रखण्ड तथा जिला स्तर पर इन योजनाओं से लोग लाभानिवत हो रहे हैं या नहीं, इसकी मानीटरिंग ज्यादा महत्वपूर्ण है। संस्थागत विकास हो रहा है इसके साथ ही राज्य की संस्थाओं की अपनी पहचान बनानी चाहिए जो उसके कार्य से ही सम्भव है।

मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने उपरोक्त बातें आज समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग की बैठक के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि इस विभाग की योजनाओं का कार्यान्वयन पूरे राज्य में किस प्रकार हो रहा है, इसका जायजा वे स्वयं माह अक्टूबर से राज्य के विभिन्न जिलों के भ्रमण के दौरान करेंगे। समाज कल्याण विभाग स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूह, महिला आयोग, समाज कल्याण बोर्ड अथवा बाल आयोग द्वारा जितने भी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं उन सभी पर एक प्रतिवेदन तैयार करें। वास्तविक रूप में धरातल पर इन योजनाओं का क्या प्रतिफल है यह मैं देखना चाहूँगा, मैं उन्हें सम्बोधित करना चाहूँगा। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक जिले में डेढ़ घण्टे का समय अलग से देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य महिला आयोग एवं बाल संरक्षण आयोग की पहुँच जिला स्तर पर अवष्य होनी चाहिए ताकि सुदूर एवं दुर्गम क्षेत्रों की महिलाओं को भी इनका लाभ मिलेंं।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को उनके अपने वेबसार्इट के निर्माण हेतु निदेष दिया। उन्होंने कहा कि विभाग का अपना वेबसार्इट अवष्य होना चाहिए। सरकार की जितनी भी लाभकारी योजनाएं हैं, वह आम लोंगो की जानकारी में रहनी चाहिए। पारदर्षिता जितनी अधिक होगी सफलता की सम्भावना भी उतनी अधिक होगी। इसमें सभी योजनाओं की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। वेबसार्इट को प्रतिदिन अपडेट करें जितने भी सूचना पत्र निर्गत हों उन सभी को वेबसार्इट पर दें। उसका मार्इक्रोलेबल मानीटिरिंग होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने आपका सी.एम. डाट काम की कार्य प्रणाली से लोगों को अवगत कराया।

माननीय मुख्यमंत्री ने इस हेतु विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार पर भी बल दिया। उन्होंने प्रचार के दोनों ही माध्यमों (प्रिंट तथा इलेक्ट्रानिक) के उपयोग का निदेष दिया। विभाग के जितने भी हेल्प लार्इन हैं इसकी सूचना पंचायत स्तर तक होनी चाहिए। इसके लिए विज्ञापन प्रकाषित कर लोंगो को जागरूक करें। लोंगो की आवष्यकताएँ क्या हैं, उनकी सोच क्या है इसे समझना होगा।

श्री मुण्डा ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग का एक महत्वपूर्ण काम आँगनबाड़ी के माध्यम से गाँव स्तर तक चलता है। इसके साथ ही समाज कल्याण के अन्य कार्यक्रमों को भी विजुअलार्इज करना आवष्यक है जैसे ओल्ड ऐज होम, ब्लार्इंड स्कूल, महिला छात्रावास इत्यादि। उन्होंने कहा कि इस संस्थानों को चलाने के लिए प्रतिबद्ध स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन करें। उन्होंने कहा कि यह दु:ख का विषय है कि राज्य में ब्लार्इंड स्कूल है, परन्तु षिक्षक के अभाव में वह चल नहीं रहा है। इसी प्रकार उन्होंने राज्य में ओल्ड ऐज होम, महिला छात्रावास इत्यादि की भी सिथति की जानकारी ली। उन्होंने सर्वप्रथम आधारभूत आंकड़ों के संकलन पर बल दिया। बिना वास्तविक आंकड़ों के योजना के कार्यान्वयन का उíेष्य पूरा नहीं होता है। मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के राज्य स्तरीय सम्मेलन के आयोजन हेतु निदेष देते हुए कहा कि विषेष कार्यों के लिए प्रतिबद्ध संस्थाओं का चयन कर उन्हें प्रषिक्षित करें और प्रोत्साहित करें तभी इस क्षेत्र में सफलता सुनिषिचत है। इस कार्य में संवेदना आवष्यक है तभी सेवा हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रत्येक माह महिला आयोग, समाज कल्याण बोर्ड, बाल आयोग इत्यादि के बैठक पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक कार्य में लोंगों की सहभागिता आवष्यक है। सरकार सेवा उपलब्ध कराती है, परन्तु वह सेवा लोगों तक पहुँच पा रही है अथवा नही इसकी जानकारी जनता से लेनी चाहिए। मासिक बैठक में क्षेत्रीय स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। विषेष कर गरीब परिवार की महिलाओं एवं आदिम जनजाति की महिलाओं तक भी सभी संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचना चाहिए।

इस अवसर पर समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती बिमला प्रधान ने कहा कि महिलाओं के लिए चार जगहों पर हेल्प लार्इन कार्यरत है परन्तु हयूमन ट्रैफिकिंग को देखते हुए गुमला, सिमडेगा एवं लोहरदगा में भी हेल्प लार्इन आवष्यक है। महिला कोषांग 12 जिलों में कार्यरत है। महिलाएं उत्सुक हैं उनके सषकितकरण के लिए त्रिस्तरीय पंचायत स्तर पर पूरे मनोयोग से काम करने की आवष्यकता है।

बैठक में सचिव, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती मृदुला सिन्हा ने विभाग के बजटीय प्रावधान, योजनाओं तथा विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में महिला आयोग की अध्यक्ष, श्रीमती हेमलता एसŒ मोहन, समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष, श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष, श्रीमती रूपलक्ष्मी मुण्डा भी उपसिथत थी।

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