Make Anganwadi Kendras functional,says Jharkhand Chief Secy

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While reviewing the works being carried out by the social welfare department today,Jharkhand Chief Secretary RS Sharma advised its Principal Secretary Mridula Sinha to ensure success of the schemes meant for the women and child,it was necessary to make Anganwadi Kendras functional.

A press release issued by public relation department in Hindi said as follows:

समाज कल्याण विभाग के तहत महिलाओं एवं बच्चों के लिए चलाए जा रहे कल्याण कारी योजनाओं की सफलता हेतु आंगनबाड़ी केन्द्रों का सफल संचालन सुनिशिचत करें। योजनओं के दीर्घकालिक परिणाम एवं सफलता हेतु विशेष प्रयास किए जाएं। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दी जाने वाली सुविधाओं से संबंधित आवष्यक प्रणाली को और सशक्त एवं बेहतर बनाए जाएं।

मुख्य सचिव श्री आर0एस0शर्मा ने उपरोक्त बातें आज प्रोजेक्ट भवन सिथत सभा कक्ष में समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत लाभुकों को दी जानेवाली राशि सीधे-सीधे उनके बैंक खाते में स्थानान्तरति किए जाएं जिसके लिए आधार को उनकी पहचान बनाएंं। आधार संख्या ही लाभुक संख्या के रूप में मानी जाए। लाभुकों की पहचान सुनिषिचत करने हेतु आधार संख्या सहित डिजिटार्इज्ड डाटा तैयार करें। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कार्य करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सविकाओं को आधार के माध्यम से पहचान सुनिषिचत करते हुए सीधे उनके खाता के माध्यम से राषि का भुगतान किया जाए।

श्री शर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए विषेष योजनाएं संचालित की जाती हैं, अत: बच्चों की पहचान सुनिषिचत करने हेतु उन्हें भी आधार संख्या दिए जाएं। बच्चों को आधार से जोड़ने की जिम्मेवारी सी0डी0पी0ओ0 को दें तथा संबंधित सूचना एम0आर्इ0एस0 पर भी उपलब्ध कराएं। आधार संख्या ही लाभुकों की पहचान संख्या मानी जा सकती है। विभिन्न विभाग द्वारा चलार्इ जा रही योजनाओं के बीच समन्वय बनार्इ जाए ताकि किसी भी योजना के तहत लाभुकों की डुप्लीकेसी न हो।

स्वामी विवेकानन्द स्वावलम्बन प्रोत्साहन योजना के संबंध में मुख्य सचिव ने निदेष दिया कि भारत सरकार द्वारा निषक्तता से संबंधित योजनाएं चलार्इ जा रही हैं, अत: लाभुकों की पहचान सुनिषिचत करें। एन0ए0सी0पी0 के वेबसार्इट पर राष्ट्रीय योजना से संबंधित लाभुकों की सूची सुलभ है। राज्य सरकार के तहत कार्यरत समाज कल्याण विभाग द्वारा भी वेबसार्इट का निर्माण करया जाए तथा संबंधित लाभुकों की सूची वेबसार्इट पर उपलब्ध करार्इ जाएं। दोनों ही योजनाओं का लक्ष्य एक है, अत: लाभानिवत की पहचान सुनिषिचत करना आवष्यक है। नए आंगनबाड़ी केन्द्र के निर्माण के संबंध में मुख्य सचिव ने कहा कि प्री-फैविरिकेटेड भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि भवन निर्माण में लगने वाले समय को कम किया जा सके।

बैठक में प्रधान सचिव समाज कल्याण (महिला एवं विकास विभाग) श्रीमती मृदुला सिन्हा ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के सम्बंध में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुपोषण से पिडि़त बच्चों के लिए जीवन आषा योजना चलार्इ जा रही है। राज्य में साठ हजार बच्चों की पहचान सैम-चिल्ड्रेन के रूप में की गर्इ है, जिन्हें थिरेप्यूटिक फूड के माध्यम से चिकित्सीय सुविधा दी जा रही है। र्इलाजोपरांत इन बच्चों की देख-भाल के लिए बच्चों की माता के खाते में सीधे सहायता राषि स्थानांतरित की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस योजना में आवष्यक सहयोग दिया जा रहा है। किषोरियों के लिए सबला योजना चलार्इ जा रही है। इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार द्वारा झारखण्ड सरकार को पुरस्Ñत भी किया गया है। आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्री-स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके लिए आवष्यक शैक्षणिक सामग्री विभाग सुलभ करा रहा है। आंगनबाड़ी सेविकाओं से मोबार्इल के माध्यम से सीधे सम्पर्क करते हुए मानिटरिंग का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ”चलो आंगनबाड़ी केन्द्र अभियान के तहत मात्र एक दिन 17 मर्इ, 2013 को 101388 बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र से जोड़ा गया। राज्य में अभी 563579 बच्चें आंगनबाड़ी केन्द्रों से जुड़े हुए हैं, साथ ही लाभानिवत हो रहे हैं।

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