उर्जा विकास के प्रमुख कारक होने के साथ -साथ प्रगति की अनिवार्य शर्त है : मुख्यमंत्री

Press Release

राँची, दिनांक 29 अगस्त, 2012

Jharkhand Press energy developmentउर्जा विकास के प्रमुख कारक होने के साथ -साथ प्रगति की अनिवार्य शर्त है। ऊर्जा संरक्षण को कतई नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। उर्जा के प्रबंधन में उपलब्ध उर्जा के अधिकतम उपयोग के साथ ही, इसके बचत, इससे होने वाले लाभ एवं परिणाम सभी का महत्वपूर्ण स्थान है। यह आवश्यक है कि उर्जा का एकत्रिकरण कैसे हो। सामूहिक एवं व्यक्तिगत दोनों ही स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिए सचेष्ट एवं सतत प्रयासरत रहना होगा।

मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने आज स्थानीय होटल रेडीसन ब्लू में बचत लैम्प योजना से संबंधित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 15 रू0 में एक सी0एफ0एल0 बल्ब उपलब्ध कराया जाना है। प्रति उपभोक्ता अधिकतम 04 बल्ब दिये जाने इसके उपयोग से उर्जा बचत एवं पर्यावरण पर उर्जा के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन ही उर्जा का प्रतिरूप है। क्षमता विकास करते हुए सामूहिक रूप से प्रयत्न किए जाएं तो उर्जा का अधिकतम संरक्षण किया जा सकता है। नैतिक उत्तरदायित्व अपने आप में बहुत बड़ी उर्जा है। इसका प्रबंधन हो तो समाज, राज्य एवं राष्ट्रीय सभी को लाभ मिलेगा। इसमें समय का उपयोग सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। व्यक्ति के पास सीमित समय है, और इसे वह अस्वीकार करते हुए अपने जीवन का भी प्रबंधन नहीं करता। दूसरे शब्दों में कहें तो समय ही धन है एवं विचार मुद्रा। अगर सभी व्यक्ति अपनी नैतिक जिम्मेवारी को समझते हुए कार्य करें तो वह दिन दूर नहीं की प्रत्येक गाँव, प्रत्येक घर तक बिजली पहुँचेगी।

उर्जा बचत में पंचायत की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतों को इस हेतु सक्रिय भागीदार बनाना चाहिए। पंचायत एवं जिला को सहयोगी के तौर पर संबद्ध करते हुए उपलब्ध उर्जा का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अबाध विद्युत आपूर्ति अनिवार्य है। उर्जा संचरण की व्यवस्था में लिकेज को कम से कम करने का प्रयास करना है। झारखण्ड राज्य विद्युत आयोग एक टीम के रूप में कार्य करे ताकि उर्जा की हानि न हो और अधिकतम परिणाम आए तथा सभी को इसका लाभ मिले इसके लिए वे प्रयासरत रहें।मुख्यमंत्री , Jharkhand State News

इस अवसर पर ब्यूरो आॅफ एनर्जी इफीसिएन्सी की उर्जा अर्थशास्त्री श्रीमती वंदना ठाकुर ने बचत लैम्प योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे राज्य में कैसे लागू कर सकते हैं, इससे होने वाले लाभ, उर्जा बचत एवं पर्यावरण संरक्षण पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने केरल राज्य में इस योजना की सफलता के संबंध में भी जानकारी दिया।

इस अवसर पर प्रधान सचिव, उर्जा विभाग, श्री विमल कीर्ति सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। बैठक में उर्जा विभाग के विशेष सचिव, श्री वी0एस0गौड़़, झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष श्री एस0एन0वर्मा, विद्युत नियामक आयोग के टी0मुनिकृष्णैया समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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