JARDCL’s Board meeting held

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Jharkhand Chief Secretary RS Sharma today observed that the payment of contractors involved in construction of roads be made in time.

Sharma made this observation while addressing the 16th meeting of Jharkhand Accelerated Road Development Company Ltd’s Board meeting at Project Bhawan in Ranchi today .

A press release issued by the public relations department in Hindi said as follows:

राज्य में सड़क निर्माण से संबंधित कार्यों का भुगतान ससमय किए जाएं। ऐसा पाया जाता है कि यह प्रवृत्ति बन चुकी है कि कार्य करा ंिलए जाते हैं, परन्तु भुगतान में अनावश्यक विलम्ब किया जाता है तथा संवेदकों में असंतोष की भावना बन जाती है।

मुख्य सचिव श्री आर0एस0 शर्मा ने उपरोक्त बातें आज अपने सभा-कक्ष में झारखण्ड एक्सेलरेटेड रोड डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड के 16वें बोर्ड मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा। कम्पनी द्वारा अब तक किए गए कार्यों, लेखा, आंतरिक अंकेक्षण प्रतिवेदन, लाभ एवं हानि पर दिए गए विस्तृत प्रतिवेदन का अध्ययन किया गया।

सड़क निर्माण में भूमि अधिग्रहण संबंधी कठिनार्इयों के संबंध में मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि अधिग्रहण का भुगतान ससमय किया जाए। भूमि अधिग्रहण में दर निर्धारण, वास्तविक कब्जा इत्यादि का निराकरण शीघ्र कर लिया जाए तथा चालू योजनाओं को ससमय पूरा किया जाए।
बैठक में प्रधान सचिव पथ निर्माण विभाग श्रीमती राजबाला वर्मा समेत अन्य बोर्ड आफ डायरेक्टर भी उपसिथत थे।

Construct building in remote areas with pre fabricated materials

With the use of prefabricated materials,the construction of buildings in remote and rural areas should be taken up as a pilot project.

This was suggested by Chief Secretary RS Sharma in a meeting held inside the Project Bhawan today .

राज्य के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कम समय में भवन निर्माण की आवश्यकता के मíेनजर राज्य में प्रीफैबरीकेटेड सामग्रीयों से भवन निर्माण के कार्य को पायलेट प्रोजेक्ट के तहत आरम्भ किए जाएं। इस हेतु भवन निर्माण विभाग मगचतमेेपवद व पिदजमतमेज की मांग करें।

मुख्य सचिव श्री आर0एस0शर्मा ने उपरोक्त बातें प्रोजेक्ट भवन सिथत अपने सभा-कक्ष में प्रीफैबरीकेटेड निर्माण तकनीक पर बैठक को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि हमारा उíेश्य कम लागत पर आधुनिकतम तकनीक का उपयोग करते हुए आमजन को सुविधाएं मुहैया कराना है। इस तकनीक के माध्यम से बहुत ही कम अवधि में भवन निर्माण सम्भव हो सकेगा। राज्य के अनेक जिलों में आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र, स्वास्थ्य उप केन्द्र, प्राथमिक विधालय, अनुसुचित जाति तथा अनुसुचित जन-जाति छात्रावास, बैरक, चेक पोस्ट इत्यादि के भवनों के निर्माण इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। इस तकनीक के माध्यम से महाराष्ट्र, कर्नाटक पुलिस हाउसिंग, दिल्ली आदि स्थानों पर पूर्व से ही भवन निर्माण के कार्य किए जा रहे हैं।

बैठक में ऐसे अनेकों संस्थान जिनके द्वारा प्रीफैबरीकेटेड भवन का निर्माण किया जाता है, उनके कार्य प्रणाली का अध्ययन प्रजेंटेशन के माध्यम से किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि भवन निर्माण विभाग ऐसे संस्थानों से निविदा के माध्यम से प्रतिवेदन आमंत्रित करते हुए पायलेट प्रोजेक्ट के तहत निर्माण कार्य कराया जाए। इस तरह के कार्य हेतु एक कमिटि निर्माण कार्य की समीक्षा कर यह निर्णय ले कि किस तकनीक को अपनाना बेहतर होगा। जितनी अधिक कम्पनियां निविदा में शामिल होती है, उससे बेहतर तकनीकी की जानकारी प्राप्त हो सकेगी तथा उच्च गुणवत्ता का कार्य किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने कहा कि इस तकनीक के साथ कार्य करने में समय कम लगेगा साथ ही रख-रखाव पर खर्च नहीं आएगा। परन्तु जब तक इस तकनीक पर निर्णय नहीं होता है तब तक भवन निर्माण का कार्य नहीं रोका जाए।

बैठक में प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग श्री आर0एस0 पोíार, प्रधान सचिव भवन श्रीमती राजबाला वर्मा, प्रधान सचिव कल्याण श्री एल0 ख्यांग्ते, सचिव स्वास्थ्य श्री के0 विधासागर, सचिव मानव संसाधन एवं विकास विभाग श्री एम0आर0मीणा उपसिथत थे।

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