भाजपा को मिलेगी कड़ी टक्कर, इन सीटों पर जीत सकती है कांग्रेस

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रांची. झारखंड में कांग्रेस ने 2014 के मोदी लहर में एक भी सीटों पर अपना परचम नही लहराया था। तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत साथ साथ झारखंड में हुए उपचुनाव के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं। कांग्रेस झारखंड की 9 या 7 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लडऩे की घोषणा कर सकती है। इस बार झारखंड में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। सूबे में कई ऐसी सीटें हैं जहां पर कांग्रेस की जीत पक्की मानी जा रही है। धनबाद, लोहरदगा, चाईबासा, जमशेदपुर, रांची ,गोड्डा ये ऐसी सीटें हैं जहां से कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिख रही है।सूत्रों की मानें तो ये वे सीटें हैं जहां से कांग्रेस की इस बार जीत पक्की रहेगी। वहीं धनबाद से कांग्रेस के पूर्व संसद और झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री के ददई दुबे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। 2009 में वे भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह से चुनाव हार गए थे। इस बार ददई दुबे की जीत पक्की मानी जा रही है,क्योंकि लगातार चार बार सांसद रही ,बीजेपी के कद्दावर नेत्री रीता वर्मा को ददई दुबे ने ही हराया था,मजदूरों उनकी काफ़ी मजबूत पकड़ हैं। वहीं लोहरदगा लोकसभा सीट से रामेश्वर उरांव की जीत भी पक्की मानी जा रही है।
वह मोदी लहर में भी मात्र 6489 मतों से पराजित हुए थे । 2019 में वे फिर से अपनी किस्मत आजमाएंगे। माना जा रहा है कि इस बार उनकी जीत पक्की मानी जा रही है, लेकिन चुनाव में हार-जीत के बारे में अभी कहना मुश्किल होगा।
वहीं चाईबासा से निर्दलीय चुनाव लड़ी पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी गीता कोड़ा भी कांग्रेस में शामिल हों गई हैं वो भी 2014 में मोदी लहर में दूसरे स्थान पर थी ऐसे में माना जा रहा है कि उनकी जीत भी पक्की हैं।कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार भी जमशेदपुर सीट से दूसरे स्थान पर थे।वे वर्तमान सांसद विधुत वरण महतों से 99876 मतों से चुनाव हारे थे, वो भी जमशेदपुर से चुनाव लड़ने के लिए क्षेत्र में मेहनत कर रहे हैं।पूर्व केंद्रीय मंत्री और रांची के पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय भी लगातार जनसम्पर्क में लगे हुए हैं,वही गोड्डा से पूर्व सांसद फुरकान अंसारी भी 2014 में दूसरे स्थान पर थे और 60682 मतों से निशिकांत दुबे के हाथों पराजित हुए थे,वो भी अपनी उमीदवारी पक्की मान रहे हैं

उप मुख्यमंत्री उम्मीदवार हो सकते है डॉ अजय

अंदरूनी सूत्रों की माने तो झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय ,लोकसभा में अपनी किस्मत नही भी आजमा सकते है, वजह है गीता कोडा का आना, शहरी वोटरों में भाजपा की पैठ, झा मु मो का कोल्हान में मजबूत होता आधार, कुणाल सारंगी और आस्तिक महतो की व्यक्तिगत छवि और वरिष्ठ कांग्रेसियों द्वारा डॉ अजय को अभी तक नेता नही माना जाना, एक चर्चा ये भी आई थी कि धनबाद या हज़ारीबाग़ से भी उम्मीदवार हो सकते है डॉ अजय, लेकिन कांग्रेस सेवा दल के सूत्रों की माने तो आलाकमान की इच्छा डॉ अजय को उप मुख्यमंत्री की तरह पेश करने की है, जिससे विधानसभा में प्रदर्शन सुधार की संभावनाएं बढ़ जाएं, वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि संगठन के स्तर पर बहुत सारी कमियां अभी भी है जो कि बाद में भारी पड़ सकती है,साथ ही सोशल मीडिया पर भाजपा और झा मु मो से फिलहाल काफी पीछे चल रही कांग्रेस को काफी कुछ करना है । फिलहाल वक़्त तो है इन्तेजार का और सियासी गलियों में चल रही इन अटकलों पर टिकट घोषणा की पुष्टि का ।

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