सात दिवसीय गहन विभागीय समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने नगर विकास …

Press Release

सात दिवसीय गहन विभागीय समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा  ने नगर विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, भवन निर्माण, ग्रामीण कार्य विभाग एवं श्रम नियोजन तथा प्रषिक्षण विभाग की आर्थिक, भौतिक, पूंजीगत, राजस्व अधिप्रापित आदि सभी बिंदुओं के आलोक में ए0टी0आर्इ0 के सभागार में गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व निदेषित बिंदुओं यथा विभाग द्वारा वेबसार्इट पर पूरी सूचनाएं अधतन किए जाने, बजट का लेखा-जोखा स्पष्ट रूप से रखने, उपबंधित राषि के विनियोजन, अगि्रम पी0एल0 खाता, क्षेत्रीय संतुलित विकास के आलोक में योजनाओं के सूत्रण, बजट तैयार करने की प्रक्रिया में सुधार, पंचायती राज संस्थाओं को सषक्त बनाने की प्रक्रिया में लिए जा रहे है निर्णय, सेवा के अधिकार, पारदर्षिता, विभाग के दोषी पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्रवार्इ और रिक्त पदों की अधियाचना का बिंदुवार भौतिक मूल्यांकन किया गया।

दूसरी पाली की इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्री, श्री चन्द्रप्रकाष चौधरी, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के विकास सहालकार, विकास आयुक्त, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, सचिव, भवन निर्माण, प्रधान सचिव, ग्रामीण कार्य, प्रधान सचिव, श्रम नियोजन एवं प्रषिक्षण अन्य अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया।

उपयुक्त मानदण्डों के आलोक में भवन निर्माण द्वारा अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर असंतोष जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम कार्यान्वयन, योजना मद, निदेष एवं मानिटरिंग के लिए नर्इ तकनीक को प्रभावी बनाने का आदेष दिया। सचिव, इस बात का मूल्यांकन करें कि उनकी टीम सक्षम है या नहीं और यदि कठिनार्इ है तो वर्केबुल कैडर निर्माण का प्रस्ताव लाएँ। विभाग में एम0आर्इ0एस0 नहीं है। हर हाल में झारखण्ड को परिणाम चाहिए। दो सप्ताह के अन्दर आर्किटेक्ट, इन हाउस टेक्नीकल पर्सन की व्यवस्था करें। एल0डब्ल्यू0र्इ0 क्षेत्र में पालिटेकनीकआर्इ0टी0आर्इ0 भवन निर्मित नहीं किए जाने की सिथति को गंभीरता से लेते हुए इस कार्य से प्रमण्डलीय आयुक्तों को संबंद्ध करते हुए शीघ्र परिणाम की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने अपेक्षित परिणाम नहीं देने वाले कार्यपालक अभियन्ता, भवन निर्माण, देवघर को विथ ड्रा करने का आदेष दिया। इसी के साथ उन्होंने प्रोजेक्ट भवन के पीछे शीघ्र सभा भवन बनाने, कार्य संपादन के लिए कालबद्ध कार्यक्रम तैयार करने, भुगतान में विलंब को समाप्त करने आदि पर बल दिया।

श्रम नियोजन एवं प्रषिक्षण विभाग को समर्पित सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध रहने के निदेष के साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 लाख वृद्ध, विकलांग, विधवा तक पहुँच एवं सुविधा के लिए शीघ्र भारत सरकार के समक्ष प्रस्ताव दें। विभाग के 750 करोड़ की येाजना के विरूद्ध 673 की स्वीकृति एवं 559 करोड़ के आवंटन के विरूद्ध 201 करोड़ के व्यय को और तीव्रतर करने की ओर संकेत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग का अधिकाधिक व्यय गरीब, बेसहारा के सामाजिक सुरक्षा के ऊपर होता है। इसके लिए अधिक संवेदनषीलता की आवष्यकता है।

उन्होंने श्रम विभाग के वेबसार्इट को बिंदुवार देखा और योजनागत उपबंध को भी सार्इट पर देने का आदेष दिया। इसी क्रम में भारत सरकार के मानदण्ड का अनुपालन करते हुए उन्होंने राज्य की आवष्यकतानुसार भारत सरकार से नीति में परिवर्तन के लिए आग्रह करने का भी निदेष दिया।

13वें वित्त आयोग के पैसेे से बनने वाले संस्थानों (आर्इ0टी0आर्इ0) में विलंब पर उन्होंने गंभीर चिंता प्रकट की। राष्ट्रीय बीमा योजना के तहत प्रीमियम के रूप में 60 करोड़ दिये जाने और 16 करोड़ इंष्योरेंस मद में भुगतान के सघन मोनिटर का भी ओदष दिया। सभी बेरोजगारों की श्रेणीबद्ध सूचना वेबसार्इट पर डालने, एक माह के अंदर नियोजनालय को आन-लार्इन किए जाने, औधोगिक विकास को ध्यान में रखते हुए रोजगार के लायक मानव संसाधन सृजित करने, विस्थापित के नियोजन और सिकलड मैन पावर के लिए प्लान डिजार्इन करने का भी उन्होंने आदेष दिया।

श्रम विभाग वैषिवक अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर युवाषकित को हर स्तर पर रोजगार के लायक बनावें। इनकी सारी सूचनाएं आन-लार्इन करें। साथ ही अगि्रम योजना के तहत इन सभी बिंदुओं का एम0आर्इ0एस0 डिजार्इन करें।

ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पी0एम0जी0एस0वार्इ0 को और अधिक प्रभावी बनाने, शत-प्रतिषत विनियोजन और सारी सूचनाएं पारदर्षी तरीके से देने का निदेष दिया। उन्होंने यह भी कहा कि च्डळैल् में हमारी प्रगति पीछे है। इसे अगली पंकित में लाने के लिए हर संभव उपाय किए जाय। विपत्र के भुगतान में विलंब न रहे एडवांस प्लानिंग हो, 8,000 कि0मी0 का क्ण्च्ण्त्ण् तैयार करें। ऐसी सारी सड़कों का डाटाबेस तैयार करें जो 6 वर्ष पहले बनीं थी। राज्य की पूरी सड़कों को पबिलक डोमेन में डालें।

राज्य की जनता को यह बतावें की कौन सड़क कब बनी, कब फार्इनल हुर्इं और उसकी मरम्मती के लिए क्या किया जा रहा है। विपत्र भुगतान यधपि अब आन-लार्इन हो गया है। फिर भी इसमें किसी प्रकार का विलंब बाधक होता है। मुख्यमंत्री ने विभाग के प्रधान सचिव के अनुरोध पर परामर्षी की सेवा लेने का भी निदेष दिया।

कल जल-संसाधन, वन एवं पर्यावरण, कला एवं संस्कृति, खेल-कूद, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभागों की समीक्षा मुख्यमंत्री द्वारा की जायेगी।

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