मोरहाबादी मैदान में आयोजित द्वि दिवसीय

Press Release

Arjun Munda

मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने युवा पशुपालकों, मत्स्य पालकों, कृषको से कहा कि हम सबों को गाँवों की शकित को संगठित कर एग्रो-इन्डस्ट्री की ओर बढ़ना है। अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक परिवार की जीवनशैली में उत्पादन की संरचना समाहित रही है। हमारे घरेलू उत्पादों से हमारी आहार की आवश्यकता पहले पूरी होती थी। हमें उस उत्पादन चक्र को पुर्ननीवित करना होगा ताकि आने वाले समय की आहार की जरूरतों को हम अपने शोज्न्ये सरप्लस उत्पादों से पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि कृषि , पशुपालन, मछलीपालन आदि से जुड़े युवा न केवल अपने संबंधित क्षेत्र की बलिक पूरे गाँव और पंचायत की पूरी वैज्ञानिक जानकारी रखें ताकि वे अपनी पंचायतों के कार्यकलापों में सक्रिय रूप से भागीदार हो सकें।

मुख्यमंत्री आज स्थानीय मोरहाबादी मैदान में आयोजित द्वि दिवसीय ”युवा एवं कौशल विकास मेला-सह-प्रदर्शनी के दूसरे दिन आयोजित ”पशुपालन दिवस का उदघाटन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ”पशुपालकों के लिए हस्तपुसितका एवं ”कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण हस्तक का विमोचन किया एवं उतिक्रिश पशुपालकों, कुक्कुटपालकों को पुरस्कार दिया। इस मौके पर उन्होंने अठारह कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र प्रभारियों को नियुकित पत्र भी दिया।

जरूरत के साथ-साथ जागृति को उन्होंने आवश्यक बताते हुए कहा कि आज लोग बाजार की ओर आश्रित हैं। इसे चुनौती के रूप में लेते हुए राज्य के मत्स्य कृषको संकल्प लें कि हम दूसरे राज्यों को अपने प्रदेश में उत्पादित मछली उपलब्ध कराएँ। इसके अलावे मछलियों की उन प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा दें जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में माँग है।

राज्य सरकार ने कौशल विकास और क्षमता संवद्र्धन की योजना शुरू की है। पारंपरिक रोजगार और उधम में कोर्इ भेदभाव या बंधन नहीं है। अब कोर्इ भी अपना मनचाहा उधम शुरू कर सकता है जो मुनाफा देने वाला हो। हर व्यकित ओरियेन्टेशन, मोटिवेशन और प्रशिक्षण को प्रमुखता दे ताकि समय की पूरी उर्जा का सदुपयोग हो। सभी विभागों को निदेशित किया गया है कि ”कौशल विकास कार्य क्रम के अन्तर्गत संबंधित क्षेत्रों के जुड़े सभी लोगों की टीम बनाकर उनकी उर्जा का सकारात्मक उपयोग करें। इससे परिवार खुशहाल होंगें। राज्य खुशहाल होगा एव ंहम वास्तविक ग्रोथ सामने आएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों के उधमी एवं उत्साही युवा संबंधित सरकारी विभाग को अपना पार्टनर समझें। हरेक स्तर पर जवाबदेही सुनिशिचत होगी तो निशिचतरूपेण परिणाम सामने आएंगें।

कृषि मंत्री श्री सत्यानन्द झा बाटुल ने अपने संबोधन में कहा कि आर्गेनिक खेती के लिए पशुधन की रक्षा जरूरी है। पशुओं के नस्ल, सुधार के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु सरकार प्रयासरत हैं।

स्चिव, कृषि पशुपालन एवं गन्ना विकास विभाग श्री ए0के0सिंह ने बताया कि राज्य में दुग्ध उत्पादन वर्ष 2001 में 9 लाख टन या जो बढ़कर वर्ष 2001 में 17 लाख टन हो गया। पशुपालकों को 33,000 गाएँ वितरित की गर्इ है। मछली उत्पादन भी 14000 टन से बढ़कर 92,000 टन प्रतिवर्ष हो गया है।

इस अवसर पर निदेशक, कृषि श्री के0के0सोन, श्रमायुक्त श्री सुनील कु0 वर्णवाल, निदेशक मत्स्य श्री राजीव कुमार सहित कर्इ गणमान्य व्यकित, पदाधिकारी एवं उधमी उपसिथत थे। स्वागत संबोधन निदेशक, पशुपालन डा0 कैप्टन ए0जी0 बंधोपाध्याय ने किया।

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