पारदर्शिता विकास की पहली शर्त है

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पारदर्शिता विकास की पहली शर्त है। सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी आवश्यक है। सभी विभाग 15 दिनों के भीतर अपने वेबसार्इट तैयार कर अदयतन पूरी जानकारी अपलोड करें। सभी कार्यक्रम, योजनाएं, व्यय, लाभुक इत्यादि की सूचना जिलावार वेबसार्इट पर होनी चाहिए। सभी विभागों के वेबसार्इट झारखण्ड डाट जी0ओ0वी0 डाट इन से जुड़े हों। एक गेटवे सिस्टम होना चाहिए। वेबसार्इट अपडेटिंग के लिए विशेष कोषांग का गठन किया जाए। सूचना के अधिकार, इलेक्ट्रोनिक प्रदाय कानून का सख्ती से पालन होने चाहिए। इसके लिए 2 माह के समय सीमा के भीतर एम0आर्इ0एस0 पूरे कर लें। सभी कर्मियों को इस संदर्भ में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।

मुख्यमंत्री श्री अजर्ुन मुण्डा ने उपरोक्त बातें आज श्री Ñष्ण लोक प्रशिक्षण संस्थान में Ñषि, पशुपालन, मत्स्य एवं गव्य विकास विभाग के समीक्षा बैठक के दौरान कहा। योजनाओं का निर्माण आगामी 5 वर्षों का आकलन करते हुए किया जाना आवश्यक है। विभाग का दायित्व योजनाओं का निर्माण मात्र ही नही बलिक योजनाओं की उपलबिध एवं उससे होने वाले लाभानिवत हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पूरा ध्यान होना चाहिए। योजनाओं में आमजन की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। हमें उन्हें प्रेरित करना है ताकि वे योजनाओं का अधिकतम लाभ ले सके। इसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को भी समिमलित किया जाए ताकि ग्रास रूट लेवल पर विकास सम्भव हो सके। विभाग पंचायत स्तर से कराए जाने वाले कार्यों को चयनित कर उन्हेें जिम्मेवारी सौंपे। पंचायतों को शीघ्र सशक्त बनाना अनिवार्य है। जिला परिषद को कार्य एवं वित्तीय शकित सौंपते हुए उन्हें सुदृढ़ एवं निर्णायक बनाएं। शकित के विकेन्द्रीकरण का परिपत्र तैयार करना होगा ताकि पंचायत एक निर्धारित माडयूल के आधार पर कार्य कर सके। पंचायत स्तर तक सभी सूचनाएं पहुंचनी चाहिए।

विभागों द्वारा व्यय की विवरणी दी जाती है परन्तु योजना एवं इसके व्यय में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। सभी क्षेत्र में समानुपातिक रूप से विकास आवश्यक है। पूरे आंकड़े स्पष्ट होने चाहिए। दिसम्बर माह में वेबसार्इट के माध्यम से योजनाओं एवं उस पर होने वाले व्यय की समीक्षा आनलार्इन की जाएगी। गव्य विकास, मत्स्य अपनी योजनाओं का ब्लू प्रिन्ट तैयार करें साथ ही उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की भी योजना बनाएं।

राज्य में सुखाड़ की घोषणा के उपरांत वैकलिपक फसल के रूप में विभाग द्वारा की गर्इ तैयारी की उन्होंने समीक्षा की। सुखाड़, फसलों का आच्छादन, वर्षापात, तलाबों का गहरीकरण सभी में पंचायत स्तर से सूचना प्राप्त करने पर उन्होंने महत्व दिया। अधिकारियों द्वारा क्षेत्र भ्रमण करनें का भी उन्होंने निदेश दिया।

उन्होंने विभिन्न विभागों में कर्मियों की कमी को गम्भीरता से लेते हुए निदेश दिया कि शीघ्र ही सभी विभागों द्वारा सेवा नियमावली बनार्इ जाए। झारखण्ड गठन के बाद बिहार के नियमावली को अंगीÑत किया गया था। जिन विभागों द्वारा अब तक नियमावली नहीं बन सकी है, वत्र्तमान नियमावली के आधार पर झारखण्ड लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेजी जाए ताकि नियुकित की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा सके। उन्होंने विभिन्न विभागों में कर्मियों के विरूद्ध लमिबत विभागीय कार्यवार्इ के संबंध में कहा कि इसका निबटारा शीघ्रतिशीघ्र होना चाहिए। न्यायालय में लमिबत मामलों के कारण विभागीय मामले लमिबत रखना उचित नहीं है। कर्मियों के गोपनीय अभ्युकित को अदयतन करने का निदेश दिया। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा निकाले गए परिपत्रों के कम्पेडियम के निर्माण का भी उन्होंने निदेश दिया।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, डा0 डी0के0तिवारी ने कहा कि सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग द्वारा शीघ्र ही र्इ-लार्इब्रेरी बनाया जा रहा है। इसके लिए सभी विभाग अपने परिपत्रों को साफ्ट कापी के रूप में सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग को उपलब्ध करादें ताकि वे र्इ-लार्इब्रेरी में संग्रहित हो सके। राज्य यह वर्ष बिटिया वर्ष के रूप में मना रहा है। सभी विभाग अपने-अपने स्तर से इसके लिए कार्य कर रहें हैं। विभाग बिटिया वर्ष को ध्यानगत रखते हुए किए गए कार्यों के आधार पर एक प्रतिवेदन सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग को उपलबध करा देें ताकि वह उसे संकलित कर सकें।

बैठक में Ñषि मंत्री श्री सत्यानंद झा बाटुल, मुख्य सचिव, श्री एस0के0चौधरी, विकास आयुक्त, श्री देवाशीष गुप्त, माननयी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, श्री डा0 डी0के0तिवारी, प्रधान सचिव, Ñषि श्री ए0के0सिंह, सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, श्री एन0एन0 सिन्हा, सचिव, योजना एवं विकास विभाग, श्री अविनाश कुमार, मुख्यमंत्री के विकास सलाहकार, श्री आर0सी0सिन्हा तथा Ñषि, पशुपालन, मत्स्य, गव्य विकास विभाग के निदेशकगण एवं अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपसिथत थे।

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