झारखण्ड जनजातीय परामर्षदातृ परिषद की बैठक

Press Release

arjun munda

झारखण्ड जनजातीय परामर्षदातृ परिषद की बैठक के माध्यम से इस बात का प्रयास किया जाता है कि जिनके लिए हमें नीति निर्धारित करनी हैं उस पर विषेष बल देते हुए योजना को ज्यादा प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा आज स्थानीय बी0एन0आर0 चाणक्या में झारखण्ड जनजातीय परामर्षदातृ परिषद की बारहवीं बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि जनता को अधिकाधिक लाभ मिले यह सुनिषिचत किया जाए।

कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे छात्रावासों के बकाए बिजली बिल के भुगतान रसोइया एवं रात्रि प्रहरी हेतु पिछली बैठक में दिए गए निदेष के अनुपालन के सम्बंध सदस्यों द्वारा उठाए गए बिन्दु के सम्बंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पंचायती राज व्यवस्था के तहत स्थानीय निकायों का चुनाव हो चुका है। इस छात्रावासों के लिए प्रक्रिया इनके माध्यम से ही करायी जानी है। जिला के अधिकारीगण जिला परिषद के प्रति भी जिम्मेवार है। जिलापरिषद जो इलेक्टेड बाडी है उसके सषäकिरण की दिषा में यह एक पहल है। शä कि विकेन्द्रीकरण अनिवार्य है। राज्य की योजनाओं एवं जिला स्तर पर उसके कार्यान्वयन के बीच तारतम्यता होनी चाहिए। जहाँ तक बकाया बिजली बिल का संबंध है, राज्य सरकार द्वारा झारखण्ड राज्य बिजली बोर्ड को 100 करोड़ रू0 की एक मुष्त राषि बकाए के एवज में उपलब्ध कराया जा रहा है। कल्याण छात्रावासों के बकाए की राषि भी उसी में सामंजित हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि बैठक में एजेंडावार्इज ही चर्चा होनी चाहिए यदि किन्ही सदस्य को किसी विषय पर ध्यान आÑष्ट कराना हो तो वे लिखित रूप से समिति के समक्ष विषय को देंगे जिसे अगली एजेंडा में शामिल कर लिया जाएगा।

सी0एन0टी0 एक्ट, एस0टी0पी0 एक्ट एवं समता जजमेंट के संबंध में चर्चा किए जाने पर उन्होंने कहा कि जो विषय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है उन पर विचार करना सुसंगत प्रतीत नही होता है। जिस विभाग से संबंधित मुíे हों उस विभाग एवं सदस्यों के बीच इस सामान्य बैठक के अतिरिक्त अलग से बैठक आयोजित किए जाएं। भूमि हस्तांतरण के मामले में भूमि एवं राजस्व विभाग के साथ अलग से बैठक हो। हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि हम किसी निषिचत समाधान तक पहुँचे। जनजातियों की समृद्ध परम्परा का संरक्षण हर हाल में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगली बैठक में सभी विभाग जनजातीयों को लाभांवित करने हेतु चलाए जा रहे विषेष कार्यक्रमों से संबंधित अपने-अपने प्रेजेंटेषन उपलब्ध कराएंगे। इसकी तैयारी अभी से आरम्भ कर दें। जनजातीय विकास के बहुआयामी प्रतिबिम्ब उभर कर आने चाहिए।

बैठक के दौरान राज्य में भूमि के अवैध हस्तांतरण पर रोक, समता जजमेंट एवं जमीन वापसी पर गतिरोध के लिए गठित उप समिति के अध्यक्ष श्री साइमन मराण्डी द्वारा बताया गया कि अलग से किसी नियमन के गठन की कोर्इ आवष्यकता नही है। सभी संबंधित विभाग अपने-अपने निर्धारित कर्तव्यों का अनुपालन करें। राज्य के हित में औधोगिक एंव संस्थागत विकास आवष्यक है, परन्तु स्थानीय हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। हमें वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की भी चिन्ता होनी चाहिए।

कल्याण विभाग द्वारा अब तक वन अधिकार अधिनियम के तहत पêा वितरण, आदिवासी कल्याण विभाग की ओर से संचालित कार्यक्रमों से संबंधित प्रतिवेदन सभी माननीय सदस्यों को उपलब्ध कराया गया। झारखण्ड वर्ष 1999-2011 के दौरान जनजातीय आबादी पर विकास के प्रभाव का मुल्यांकन संबंधित प्रतिवेदन समिति के समक्ष प्रदर्षित किया गया। बैठक में राज्य परामर्षदातृ समिति के उपाध्यक्ष श्री चम्पर्इ सोरेन, माननीय सदस्यगण सर्वश्री सार्इमन मराण्डी, लक्ष्मण गिलुआ, बड़कुवंर गगरार्इ, श्रीमती गीता श्री उरांव, सीता सोरेन, मेनका सरदार, रामदास सोरेन, दीपक बिरुआ, कमलेष उरांव, नीलकंठ सिंह मुण्डा, बंधु तिर्की, लोबिन हेम्ब्रम सहित मुख्य सचिव श्री एस0के0चौधरी, विकास आयुक्त श्री देवाषीष गुप्त, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा0 डी0के0तिवारी समेत सभी विभागों के प्रधान सचिवसचिवगण उपसिथत थे।

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