किसी भी योजना का निर्माण संसाधन एवं लक्ष्य निर्धारण

Press Release

किसी भी योजना का निर्माण संसाधन एवं लक्ष्य निर्धारण के साथ ही होना चाहिए। योजना एवं विकास विभाग, सूचना तकनीकी एवं वित्त विभाग को इस कार्य को मिलकर करना है। अपनी कमजोरियों को पहचान कर क्षमता का विकास करते हुए राज्य के विकास को गति देनी है, तभी राज्य का समग्र विकास सम्भव होगा। लक्ष्य को पाने के लिए हमें कितना परिश्रम करना है, इसको स्वयं निर्धारित करना है। इन विभागों को सिंक्रोनार्इज्ड वे में काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री अजर्ुन मुण्डा ने आज अपने आवास में योजना एवं विकास विभाग, सूचना तकनीकी, वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि योजना एवं विकास विभाग, वित्त एवं कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग का आटोमेशन कार्य सबसे पहले होना चाहिए। जो कन्ट्रोल पैनल है उसे मजबूत होना चाहिए। योजना के निर्माण में डाटा की महत्वपूर्ण भूमिका है, इस हेतु स्टेट डाटा सेंटर को सुगठित एवं सुदृढ़ बनाएं। सभी सूचनाएं एक जगह मिले इसकी समुचित व्यवस्था हो। इसमें सूचना तकनीकि की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे हर विभाग को अपनाना अनिवार्य है। सभी विभागों को पूरी तरह से कम्प्यूटरीÑत प्रणाली से काम करना होगा तभी पारदर्शिता कायम हो सकती है। यदि विभागों की आन्तरिक क्षमता में कहीं कमी है, तो कर्मियों को सूचना तकनीक के क्षेत्र में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए इस हेतु संस्थान को चिनिहत किया जाए। सूचना तकनीक की जानकारी को अनिवार्य बनाया जाए। कर्मियों को प्रोडकिटव बनाया जाए।
वित्त सचिव द्वारा कर्मियों में वित्तीय एवं कार्यपालिका नियमावली की जानकारी के अभाव की बात संज्ञान में लाए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी का अभाव एवं इन्टेंशन को अलग-अलग समझना होगा। ब्लाक स्तर तक के पदाधिकारियों के लिए महीने में एक बार वित्त, कार्मिक एवं सूचना तकनीकी का ओरिएंटेशन कोर्स होने चाहिए। फील्ड ट्रेनिंग को उनके प्रशिक्षण का अनिवार्य अंग बनाना होगा। आयुक्तों की शकित को बढ़ाया जाए ताकि आवश्यकतानुसार वे क्षेत्र स्तर पर निर्णय ले सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना निर्माण में क्षेत्रीय संतुलन अनिवार्य है। योजना निर्माण की प्रक्रिया पूर्व से ही होनी चाहिए। विभाग का डाटा, रिपोर्ट रिटन्र्स, सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं स्पष्ट होनी चाहिए। विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग आंकड़ों का संकलन किया जाता है, जिसमेें कोर्इ समानता नही होती। इसी का परिणाम है कि डाटा एनालिसिस कमजोर हो जाता है। डाटा मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत बनाया जाए। डाटा सेंन्टर एक हो तभी लक्ष्य निर्धारित कार्य हो सकेगा। इसी कारण एम0आर्इ0एस0 सिस्टम लागू करने पर बल दिया जा रहा है। एक निशिचत डाटा कलेक्शन स्रोत होना चाहिए। यदि विभाग द्वारा डाटा कम्पार्इल किया जाता है, तो योजना एवं विकास विभाग द्वारा उसकी सम्पुषिट करा ली जानी चाहिए। किसी भी परिसिथति में आंकड़ों में विरोधाभास नहीं होना चाहिए। इन आंकड़ों के एनालिसिस के लिए एक एक्सपर्ट ग्रुप होने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के निर्माण में मानिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। योजनाओं का डुपिलकेशन ना हो इसके लिए कहीं चेक प्वार्इंट भी होने चाहिए। एक रिफोर्म की आवश्यकता है। चेक प्वार्इंट के निर्धारण के लिए मैकेनिज्म तैयार करने होंगे। योजनाएं आउटकम बेस्ड हों, लक्ष्य को निर्धारित कर योजना का निर्माण होना चाहिए। कितने कार्य को कम से कम करते हुए अधिकतम आउटपुट पाया जा सकता है, इसका निर्धारण अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय डाटा एवं जिला स्तरीय डाटा अलग-अलग तैयार हो। पंचायत स्तर के लिए जो साफ्टवेयर तैयार किया गया है उसे इंप्लीमेंट कराया जाए। हर पंचायत को जी0आर्इ0एस0 से जोड़ें। मात्र स्कीम बेस्ड मानिटरिंग सिस्टम न हो, बलिक बैक आफिस मानिटरिंग सिस्टम भी मजबूत हो। अतिरिक्त संसाधन कहाँ से उपलब्ध हों, इस पर भी विचार होने चाहिए। पंचायत स्तर पर भी संसाधन विकास की संभावना तलाशें। उसे ऐकिटवेट करिये ताकि वे रिसोर्स जेनरेट कर सकें। पंचायत स्तर पर सभी विभागों की सूचनाएँ पहुँचनी चाहिए। वेबसार्इट पर विभिन्न विभागों द्वारा जितने परिपत्र दिये जाते हैं, उनका कम्पेडियम तैयार कर पंचायत स्तर तक सुलभ करायें। मुख्य सचिव ने कहा कि नये परिपत्र के निर्गत होने के साथ ही पुराने निरस्त होने वाले परिपत्रों की भी सूचना कम्पेडियम में होनी चाहिए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री एस. के. चौधरी, विकास आयुक्त श्री देवाशीष गुप्ता, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा0 डी0के0तिवारी, प्रधान सचिव सूचना एवं तकनीक तथा कर्मिक श्री एन. एन. सिन्हा, प्रधान सचिव वित्त, श्री सुखदेव सिंह, सचिव योजना एवं विकास विभाग श्री अविनाश कुमार सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपसिथत थे।

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