अर्जुन मुण्डा ने आज सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री अलतमश कबीर के सम्मान में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा

Press Release

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मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने आज सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री अलतमश कबीर के सम्मान में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुझे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री अल्तमस कबीर साहब एवं उनकी धर्मपत्नी को अपने बीच पाकर आज न केवल अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, अपितु हम गौरवानिवत महसूस कर रहे हैं। भगवान बिरसा, सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव, नीलाम्बर-पीताम्बर जैसे राष्ट्र को अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अनन्त सपूतों की धरती झारखण्ड के 3 करोड़ 29 लाख जन समुदाय की ओर से इस अवसर पर मैं, आपका अभिनन्दन करता हूँ, स्वागत करता हूँ।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड की धरती से आपका आतिमक लगाव रहा है। ऐसा कहें कि झारखण्ड की हरित रत्नगर्भा भूमि के प्रति स्वाभाविक आकर्षण एवं संवेदनशीलता है। आप झारखण्ड के कण-कण से अवगत हैं। यहाँ की माटी, संस्कृति, धरोहर, निश्चल-निहाल-ग्राम्य जीवन के प्रति आपके प्रेम से सभी अवगत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय न्यायमूर्ति श्री कबीर ने झारखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में यधपि कम समय तक ही राज्य को पल्लवित पुषिपत किया, परन्तु झारखण्डवासियों को इस बात का फक्र है कि यहाँ से वे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में योगदान किए और आज न्यायिक प्रक्रिया के शीर्ष पर विराजमान हैं। इनके बहुआयामी व्यकितत्व एवं आमजन के प्रति लगाव, सीधा संवाद, वंचितों के प्रति आत्मीय भाव की चर्चा यहाँ अकसर होती है। इस दिशा में आपने कर्इ न्यायिक प्रक्रियाओं को मूर्त रूप भी दिया। श्रनअमदपसम ठवंतके इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। हमारा प्रयास होगा कि वडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से आपका यह संवाद दूर से भी बना रहे।

आपकी समरसता न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं के बीच काफी सराहनीय विषय रही है। सर्वोच्च न्यायालय में मानवाधिकार, चुनाव सुधार जैसे अनेक महत्वपूर्ण बिन्दुओं को आपने रेखांकित किया है। ग्रामीण विधिक सहायता केन्द्रों की परिकल्पना और विधिक कल्याण के कर्इ प्रक्रम न्यायिक संवदेनशीलता का परिचय देते हैं।

महोदय, न्यायिक प्रणाली सतत विकास की एक प्रक्रिया है। भारत अपनी प्रदीर्घ न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहा है। काल परिसिथतियों के अनुरूप राज्यशाही के स्वरूप भले ही बदले हों, सामाजिक संरचना मेें परिवर्तन देखा गया हो, परन्तु हमारी न्यायिक प्रक्रिया अन्त:करण से निकली हुए र्इश्वरीय प्रेरणा है, जिसमें कभी संकुचन नहीं आया।

आज उन्नत समाज का एक मापदण्ड इसकी न्यायिक प्रक्रिया एवं प्रणाली भी है। जैसे-जैसे सांस्कृतिक विकास होता है, मनुष्य की प्रकृति एवं प्रवृत्ति स्वयं अपने कार्यों का मूल्यांकन करती है और सर्वत्र न्याय दिखार्इ पड़ता है। ”पंच परमेश्वर के पीछे यही भाव है कि उत्तरदायित्व का बोध हमारे संकुचित व्यवहारों का बहुधा सुधारक हो जाता है, अर्थात उन्नत समाज से अपराध, शोषण, व्यतिक्रम की अपेक्षा कम होती है।

अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि न्याय सहज हो, सुलभ हो और शीध्र हो, यही जन अपेक्षा है। इसके लिए विधिक जागरूकता की जरूरत है और हमारे माननीय मुख्य न्यायाधीश के व्यकितत्व का यह एक विशिष्ट पहलू है कि वे आमजन तक सहज-सुलभ न्याय पहुँचाने की सदा चिंता करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रसंग में झारखण्ड की कुछ मूलभूत बातों की ओर ध्यानाकृष्ट कराना चाहूँगा कि झारखण्ड ने अपनी प्राकृतिक संपदा, श्रमसाध्य, मानव संसाधन और विस्तीर्ण वन सम्पदा के लिए प्रसिद्ध है। हम जहाँ अपने प्राकृतिक संसाधनों से राष्ट्र निर्माण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं हमारा अवाम जीवनोपयोगी आम सुविधाओं से भी वंचित है। विडम्बना तो यह है कि जहाँ प्रकृति ने अपार सम्पदा अपने अन्दर समेट रखा है, वहीं पर सबसे अधिक गरीबी, बेरोजगारी, अभाव, कुपोषण व्याप्त है, वह चाहें वन क्षेत्र हो या कोयला-लोहा का अकूत भण्डारण क्षेत्र।

आज के आर्थिक परिदृष्य में मनुष्य के विकास-आकलन का मापदण्ड भ्नउंद क्मअमसवचउमदज प्दकमग हो, म्बवदवउपब ळतवूजी हो, च्मत ब्ंचपजं प्दबवउम हो या ळैक्च् हो, यह क्षेत्र बहुत पीछे हैं, और संभवत: अनेक सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का कारण भी इसे ही कहा जायेगा।

लगभग 30: हरित वन क्षेत्र से हम संतुलित पर्यावरण देते हैं, परन्तु यही क्षेत्र हमारी अनेक विकासशील योजनाओं एवं जन-पहल के लिए बाधक सिद्ध हो रहा है। एक ओर ढाँचागत विकास, निवेश एवं कल्याण की अनेक योजनायें प्रभावित होती हंै, वहीं दूसरी ओर वन अधिकारिता का त्वरित लाभ कानूनी पेंचदगियों में उलझकर रह जाता है। कमोबेस यही सिथति खनन क्षेत्र की भी है। यह विचार का विषय है कि धरती के अन्दर संचित रत्न हमारे लिए किस सीमा तक सौभाग्य के कारक हैं और किस हद तक दुर्भाग्यपूर्ण। हमने कभी इसका मूल्यांकन नहीं किया। यही कारण है कि जहाँ-तहाँ जन सुविधाओं, पुनर्वास, संतुलित पर्यावरण आदि की समस्यायें उठ रही हंै।

प्रकृति ने अकूत सम्पदा दी, पर हमने उसका प्रबंधन, संयोजन किस प्रकार किया कि वह इन गरीबों के लिये परिणामी नहीं बन सका ।उसकी म्बवदवउल के डंपद.ैजतमंउपदह का प्रयास नहीं हुआ। खनिज क्षेत्र की सारी नदियाँ इतना अधिक प्रदूषित हंै कि पानी को हाथ नहीं लगाया जा सकता। क्या उस क्षेत्र में उत्पादन के आधार पर आस-पास के जन समुदाय का भ्क्प् देखा जा सकता है। हम जंगल भी बचा रहे हंै, धुआँ-धूल भी पी रहे हैं और उत्पादक भी नहीं बन पा रहे हंै, बलिक केवल उपभोक्ता बनकर रह गये हैं।

सोचा तो गया था स्वू ब्वेज ळमदमतंजपवद और स्वूमेज त्ंजम व चिवससनजपवदण् मैंने इस ओर अनेक फोरम पर ध्यानाकृष्ट कराया है कि प्दकपंद म्बवदवउल कुछ और कह रही है – कुछ और अपेक्षा कर रही है और झारखण्ड की ळतवनदक त्मंसपजल कुछ और है। मैं इन बातों का उल्लेख यहाँ इसलिए कर रहा हूँ कि माननीय हमारी पीड़ा से अवगत हंै, उनके प्रति संवेदनशील हैं।

राज्य सरकार पारदर्शी, संवदेनशील एवं प्रतिबद्ध प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। अनिवार्य सेवा प्रदायी कानून द्वारा कालबद्ध कार्यान्वयन, म्.च्तवबनतमउमदजए म्.ळवअमतदंदबमए क्मसपअमतल डमबींदपेउ को व्दसपदमध्ळच्ै के माध्यम से मजबूत करने तथा समस्त सुविधाओं को म्समबजतवदपब सिस्टम से सहज-सरल जन-जन तक पहुँचाने का राज्य का संकल्प है। झारखण्ड देश का पहला राज्य है जहाँ म्समबजतवदपब माध्यमों से सेवा उपलब्ध कराने को अधिनियमित किया गया है। हमारा आरगेनिक रेशम विश्व में स्थान पा रहा है। कृषि एवं अन्य संबद्ध सेवाओं में हमारी पहुंच तेजी से बढ़ रही है।

सरकार ने वर्ष 2012 को ”बचपन बचाओ-बिटिया वर्ष के रूप में लिया और पूर्व से जारी कार्यक्रमों के अतिरिक्त ”लक्ष्मी लाडली योजना का शुभारंभ बालिकाओं की शिक्षा, जेंडर गैप आदि को ध्यान में रखकर किया। अल्पावधि में राज्य की 45 हजार नवजात बचिचयों को इस कार्यक्रम से जोड़ा गया है। 10 वर्षों में कोर्इ बालिका शिक्षा से वंचित नहीं रह पायेगी।

हम, ढ़ांचागत विकास, उत्कृष्ट मानव संसाधन सृजन, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को समृद्ध करते हुए राज्य में विकास का एक उत्पादक परिवेश निर्मित कर रहे हैं। इसमें इकोनोमिक कारीडोर, कृषि कारीडोर, नालेज सिटी, पानी प्रबंधन, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के विविध प्रक्रमों पर तेजी से काम किया जा रहा है। हमारी संपूर्ण संरचना के केन्द्र में झारखण्ड का एक अदद नागरिक है।

हमारा विश्वास है कि युवाशकित को रोजगार-स्वरोजगार के माध्यम से हीं स्वावलम्बी बनाया जा सकता है। इसके लिये कौशल विकास, देशज एवं परम्परागत उधम को संरक्षित कर उधमिता विकास और उत्पादकता को आमजन के द्वार तक पहुंचाने के विविध प्रकल्पों पर हम काम कर रहे हैं। विशेषकर वैसे हाथ जो तकनीक और उच्च शिक्षा से वंचित हैं, को उत्पादक बनाना ”2013-युवावर्ष की प्राथमिकता है। इसी प्रकार महिला सशकितकरण के क्षेत्र में राज्य स्वयं सहायता समूह, हस्तशिल्प, पारिवेशिक प्राÑतिक संसाधन आधारित उधम को तेजी से समर्थित, संवद्र्धित एवं सम्पोषित कर रहा है।

महोदय! यधपि, स्वागत और सम्मान के क्षण में अपनी पीड़ा की अभिव्यकित हमारी संस्कृति नहीं है, फिर भी आप हमारे हैं, हमारे प्रति आपकी संवेदनशीलता स्पष्ट है। इसलिए मैं चन्द बिन्दुओं को रखने से अपने को रोक नहीं सका। आवश्यकता है, झारखण्ड की युवाशकित को कौशलयुक्त बनाकर, उत्पादक बनाने की, सम्पूर्ण आर्थिक संरचना में सम्यक सहभागिता सुनिशिचत करने की तथा मौलिक अवधारणा के तहत ळतेें त्ववज तक जन सुविधायें पहुँचाने की।

राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत एवं नगरों में निकायों की संरचना ने स्वरूप ले लिया है। अब पंचायती राज के माध्यम से समेकित विकास की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रकल्प सृजनात्मक स्वरूप ले रहा है। प्रसन्नता का एक और विषय है कि इस पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

आप अवगत हैं, झारखण्ड के आम-अवाम में, यहां की माटी में लोकतंत्र एवं समस्त न्यायिक प्रक्रिया के प्रति समादर का भाव है। विशेषकर यहां के ग्राम्य जीवन में यह भाव संस्कारगत सुस्थापित है।

मैं इस अवसर पर आपका बार-बार अभिनंदन करता हूँ। इसी के साथ आग्रह है कि झारखण्ड के ऊपर अपनी विशेष Ñपा बनाये रखना चाहेेंगे।
कार्यक्रम को शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्यन्यायाधीश को मोमेंटो, शाल इत्यादि देकर सम्मानित किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री कबीर के साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीणा कबीर भी थीं कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण श्री अफताब आलम, श्रीमती ज्ञान सुधा मिश्रा, श्री एस0जे0मुखोपध्याय, मद्रास उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री एम0वार्इ0 इकबाल, झारखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री प्रकाश टाटिया एवं झारखण्ड उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशगण उपसिथत थे। समारोह में मुख्य सचिव श्री एस0के0चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा0 डी0के0तिवारी समेत अनेक वरीय पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपसिथत थे।

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